गोधन न्याय योजना क्या है पूरी जानकारी ?

छत्तीसगढ़ सरकार का जो प्लान था वहां पर ग्रामीण क्षेत्रों में कॉलोनी को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने योजना शुरू करी थी इसके तहत गाय का गोबर खरीदा जाता था यह सुनिश्चित करने के लिए कि गांव जो है साफ-सुथरे रहे stray cattle . वह समस्या हल हो जाए क्योंकि इससे एक एडिशनल इनकम जनरेट हो रही थी अब गांव के अंदर गोबर के ढेर नहीं मिल रहे थे तो तो गांव की स्वच्छता बनी हुई थी और साथ ही साथ कोई भी आवारा पशु नजर नहीं आते थे क्योंकि लोग इन पशुओंको अपने पास रखके गोबर को बेचते थे चलती हुई अपनी एक महत्वकांक्षी योजना सुराजी गांव योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ के चार चिन्हारी नरवा गरवा घुरवा बारी का संरक्षण एवं संवर्धन किया जा रहा है और इसी 4 जनवरी का विस्तार करते हुए हरेली पर्व के दिन 30 जुलाई 2020 को हुआ था एक महत्वपूर्ण योजना गोधनिया योजना का शुभारंभ करने वाली है तो आइए हम जानते हैं

गोधन न्याय योजना क्या है किसानों को उस से क्या-क्या लाभ होंगे और यह रोजगार का किस प्रकार से साधन हो सकता है योजना की संपूर्ण क्रियान्वयन व रूपरेखा के लिए मंत्रिमंडलीय समिति का गठन किया गया जिसके अध्यक्ष श्री रविंद्र चौबे हैं तथा सदस्य मोहम्मद अकबर डॉक्टर प्रेमसाय सीधे काम शिव कुमार डहरिया और जयसिंह अग्रवाल है उन्होंनेअपनी रिपोर्ट समिति के समक्ष रखें और उसी की सिफारिश के आधार पर क्या योजना छत्तीसगढ़ में 20 जुलाई 2020 को हरेली पर्व के दिन शुभारंभ किया गया था आइए जानते हैं इस योजना का प्रमुख उद्देश्य कौन-कौन से हैं बिंदु और समझने की कोशिश करते हैं

योजना का उदेश्य :-

1 पशुपालकों की आय में वृद्धि होगी

2 पशुधन विचरण एवं खुली चढ़ाई पर रोक लगेगी

3 जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा मिलेगा एवं रासायनिक उर्वरक के उपयोग में कमी लाएगी

4 खरीफ एवं रबी फसल की सुरक्षा होगी तथा क्षेत्र का विस्तार होगा

5 स्थानीय स्तर पर जैविक खाद की उपलब्धता हो पाएगी

6 स्थानीय स्वशासन समूह को रोजगार के अवसर मिलेंगे

7 भूमि की उर्वरता में सुधार होगी

8 रहित खाद्य पदार्थ की उपलब्धता एवं सुपोषण इसमें आपका मिलेगा

आइए इस योजना को ब्लॉक ग्राम के माध्यम से समझने की कोशिश करते हैं नरवा गरवा घुरवा बाड़ी के तहत जो कान में प्रत्येक गौठान में गौठान समिति का गठन किया जाएगा समिति किसानों से गोबर का करेगी एक निश्चित शासन ने ₹2 प्रति किलोग्राम निर्धारित किया है अर्थात किसानों को ₹2 प्रति किलोग्राम की दर से गौठान समिति को बेचेंगे जिसका भुगतान गौठान समिति द्वारा किया जाएगा समिति किया जाएगा है और गौठान समिति इन गोबर को इकट्ठा करके गौठान में जमा करेगी जहां गौठान में 15 से 20 दिन तक गौठान समिति के द्वारा इस गोबर को रखा जाएगा और 15 से 20 दिन तक रखने के बाद गौठान स्थान में एक वर्मी टंकी का निर्माण किया जाएगा जिसमें वर्मी कंपोस्ट का निर्माण किया जाना है इसके लिए स्व सहायता समूह का जो रोल है बहुत ही इंपॉर्टेंट होता है स्व सहायता समूह को प्रशिक्षण दिया जाएगा वर्मी कंपोस्ट तैयार करने के लिए कृषि विज्ञान केंद्र तथा राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत वर्मी कंपोस्ट की निर्माण के लिए स्व सहायता समूह को प्रशिक्षण दिया जाएगा और स्व सहायता समूह जो है गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार करेंगे वर्मी कंपोस्ट को तैयार करने के बाद वर्मी कंपोस्ट की पैकेजिंग का कार्य भी स्व सहायता समूह करेगी इसके लिए विभाग उसका समय-समय पर निरीक्षण करते रहेंगे और पैकेजिंग जो है 2 किलोग्राम 5 किलोग्राम 30 किलोग्राम के पैकेट में होगा पैकिंग करने के उपरांत इंपॉर्टेंट आता है सहकारी समिति का सहकारी समिति के माध्यम से वर्मी कंपोस्ट का वर्णन किया जाएगा एक निश्चित शासन ने ₹8 प्रति किलो की दर निर्धारित की है इसी तरह कार्यसमिति वर्मी कंपोस्ट का वितरण करेगी जिसमें कृषकों को प्राथमिकता दी जाएगी इसके अलावा जहां-जहां वर्मी कंपोस्ट की आवश्यकता पड़ती है वहां इस कंपोस्ट को भेजा जाएगा जैसे कि वन विभाग नगरी निकाय उद्यानिकी विभाग विभाग हैं जहा खाद की आवश्यकता पड़ती ही है वह इन खाद को बेचा जाएगा संक्षेप में छत्तीसगढ़ गोधन न्याय योजना किसानों से गोबर की खरीदी कर उस गोबर से वर्मी कंपोस्ट तैयार कर बेचने की योजना है इस योजना से क्या लाभ होगा तो एक और जहां किसान गोबर का विक्रय कर अपना आर्थिक सशक्तिकरण कर पाएगा वहीं गांव के जो लड़के लड़किया हैं समिति के माध्यम से स्व सहायता समूह के माध्यम से सहकारी समिति के सदस्य बनकर अपना आर्थिक सशक्तिकरण कर पाएंगे अर्थात गांव में जो गौठान हैं वह आज यूगा हब के रूप में स्थापित हो पाएगा औद्योगिक पार्क की तरह कार्य करेगा और इस पूरे विकास के केंद्र में गौठान जो है एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा पाएगी छत्तीसगढ़ की गोधन न्याय योजना बहुत ही महत्वपूर्ण योजना है इस योजना से कमपोस्ट मिलेंगे उससे जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा सुपोषण में वृद्धि होगी जो मृदा अपरदन मृदा पॉल्यूशन है उसमें रोक लगेगी किसानों की उत्पादकता में वृद्धि होगी किसानों की आर्थिक समृद्धि होगी और गांव के विकास से अर्थात किसानों के विकास से फिर राष्ट्र का विकास होगा इस योजना को आज सिर्फ राज्य के स्तर पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी देखा जा रहा है अर्थात इस योजना का क्रियान्वयन और इस योजना के जो रूपरेखा है उस पर सभी की नजर है अब देखना होगा यह योजना सिर्फ कागजों पर आती है या उसका अमल सही तरीके से हो पाता है छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इसकी उचित क्रियान्वयन के लिए इसके दायित्व एवं उत्तरदायित्व का भी निर्धारण किया गया है कलेक्टर की निगरानी में यह संपूर्ण योजना का क्रियान्वयन किया जाएगा इसके साथ ही विवादों का निपटारा करने के लिए भी प्रशासनिक अधिकारियों को जिम्मेदार इसमें बनाया गया है गोधन न्याय योजना के क्रियान्वयन में कौन-कौन सी चुनौतियां सामना करना पड़ सकता है

1 चारे की समस्या क्योंकि पशु गोबर तभी देंगे जब उचित मात्रा में चारा मिलेगी चारे की समस्या एक प्रमुख समस्या है

2 वर्मी कंपोस्ट के लिए विशेष तकनीकी और प्रशिक्षण की जरूरत पड़ेगी स्व सहायता समूह को क्योंकि किसी भी वर्मी कंपोस्ट में पार्टिसिपेट तभी कर पाएंगे जब उन्हें उचित मात्रा में पानी और छायादार एक माहौल मिलेगा

3 इसका विपणन की समस्या क्योंकि इसका मार्केटिंग भी एक आवश्यक है इन चुनौतियों को अच्छे से सामना कर पाएंगे जिस प्रकार छत्तीसगढ़ शासन ने धान की खरीदी हो चाहे लघु वनोपज को की संग्रह हो चाहे तेंदूपत्ता संग्रहण उसमें एक नए मुकाम को हासिल किया है उसी प्रकार गोधन न्याय योजना के तहत को भर गोबर को एक कीमती वस्तुओं के रूप में स्थापित कर छत्तीसगढ़ शासन एक नए कीर्ति रचने के कगार पर है आप सभी को पता है अभी वैश्विक महामारी कोरोना का समय चल रहा है और ऐसे समय में यह जनाब बहुत ही इंपॉर्टेंट हो जाता है जहां एक और किसानों को अतिरिक्त आय का साधन मिलेगा वही समिति के माध्यम से जुड़कर लोगों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे

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आज हमने सीखा :-

मैं आशा करता हूँ आप लोगों को
( गोधन न्याय योजना क्या है ) के बारे में समझ आ गया होगा. मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा.

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