Bonds क्या होते हैं What is Bonds ? इसमें इन्वेस्टमेंट कैसे कर सकते हैं

दोस्तों आप और हम अच्छी तरीके से जानते हैं कि स्टॉक मार्केट में लंबे समय में इन्वेस्टमेंट करने पर हमें काफी अच्छे खासे रिटर्न्स मिल जाते हैं लेकिन उसके साथ आता है मार्केट रिस्क यानी कि उतार-चढ़ाव जो मार्केट का है वह बहुत लोग पसंद नहीं पर काफी लोगों को मंथली इनकम चाहिए होती है अपनी इन्वेस्टमेंट से यह तो गए एक तरह की इन्वेस्टर्स

दूसरी तरह के भी इन्वेस्टर होते हैं जो एक ही जगह पर सारा पैसा नहीं डालना चाहते हैं यानी कि एक ऐसेट क्लास में सारा पैसा नहीं डालना चाहते हैं। और ज्यादातर इन्वेस्टर्स ऐसा ही करना चाहते हैं और ऐसा ही करना चाहिए क्योंकि अलग-अलग जगहों पर इन्वेस्ट करने से हमारा रिस्क कम होता है तो अगर हम स्टॉक मार्केट में पैसा नहीं डाल रहे हैं तो हमारे पास विकल्प क्या बचते हैं काफी लोग FD में पैसा डाल लेते हैं म्यूच्यूअल फंड इक्विटी का ही एक हिस्सा होता है वहां पर स्टॉक्स में ही ज्यादातर पैसे लगाए जाते हैं अब अगर हम FD पर डालते हैं तो वहां पर हमें रिटर्न्स काफी कम मिलते हैं ऐसे में बीच का एक रास्ता आता है Bonds जहां पर FD से तो ज्यादा रिटर्न मिल जाता है और स्टॉक मार्केट से रिस्क कम हो जाता है लेकिन सवाल ये उठता है कि क्या हमें Bond के बारे में या Bonds ऑपरेट कैसे कर रही है इंडिया में इसके बारे में अच्छे से पता है 90% लोगों को इसके बारे में नहीं पता है या मैं दावे के साथ कह सकता हूं और अगर आप इस ब्लॉक को पढेगे तो आपको इसमें कुछ ना कुछ जरूर सीखने के लिए मिलेगा अगर आप US मार्केट में देखेंगे तो वहां Bonds मार्केट स्टॉक मार्केट से बड़ी है चाइना में भी देखेंगे तो Bonds मार्केट स्टॉक मार्केट के लगभग बराबर है ज्यादातर देशों में बॉन्ड मार्केट या तो स्टॉक मार्केट से ज्यादा है या तो उसके बराबर है पर इंडिया में यह बहुत ही सीमित है काफी लोग तो Bond के बारे में यह भी कहते हैं कि आप डीमेट अकाउंट में जाकर Bonds खरीद सकते हो जो स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड है वह खरीद सकते हो लेकिन क्या आपको पता है यह 1% भी नहीं है Bonds के ज्यादातर Bonds लिस्टेड ही नहीं है इन पर ट्रेड ही नहीं होते हैं ज्यादातर बहुत छोटी सी मार्केट में ट्रेड होते हैं जो कि 99% मार्केट है अब सवाल उठता है कि हम आखिर बॉन्ड्स में इन्वेस्ट कैसे करें ?

बॉन्ड होते क्या है :-

पहले यह समझ लीजीए की आखीर Bonds होते क्या है मान लीजिए कोई कंपनी है उसे कुछ फंड की जरूरत है तो उसके पास विकल्प क्या-क्या है पहला विकल्प तो यह है कि वह स्टॉक मार्केट से सीधे फंड ले सकती है दूसरा विकल्प यह है कि वह बैंक से लोन ले सकती है तीसरा विकल्प यह होता है कि वह Bonds इशु करके पब्लिक से या फिर फाइनेंसल इंस्टिट्यूशन से भी पैसा ले सकती है अगर हम स्टॉक मार्केट की बात करें कंपनी अगर स्टॉक मार्केट में जाती है तो उसकी इक्विटी कम होती है उसके शेयर्स कम होते हैं उसको पब्लिक को शेयर होल्डर बनाना पड़ेगा तो उसकी परसेंटेज होल्डिंग थोड़ी सी कम होती है हो सकता है कोई कंपनी यह नही करना चाहे अगर वह बैंक के पास जाती है तो वहां पर उसे इंटरेस्ट रेट ज्यादा देना पड़ता है मान लीजिए अगर उसको 11% या 12% का ब्याज देना पड़ा तो कंपनी कहेगी कि अगर मेरे पास एक ऑप्शन 8-9 या 10 % ब्याज देने का है तो मैं वहीं क्यों ना कर लूं तो यही है एक ऑप्शन है Bonds यानी कि इसमें कंपनी को यह फायदा हो जाता है कि उसको थोड़े से कम ब्याज दर पर पैसा मिल जाते है।

बॉन्ड्स में इन्वेस्ट क्यों करना चाहिए :-

मान लिजीये हम कोई इन्वेस्टमेंट करना चाहते है इसके लिए हम बैंक कॉर्पोरेशन मे FD करते है बैंक हमसे पैसा लेती हैं FD के फॉर्म में सेविंग अकाउंट के रूप में करंट अकाउंट के रूप में मान लीजिए अगर FD पर बैंक ने हमें दिया 5 या 6 % और मार्जिन लिया 5से 6 % और लोन के रूप में उसे किसी कॉर्पोरेट को दे दिया 10 या 11 % में Bonds में यह होता है कि यह मार्जिन खत्म हो जाता है कॉर्पोरेट कहते हैं कि हम अपनी तरफ से ढाई परसेंट छोड़ देते हैं आप ढाई परसेंट एक्स्ट्रा ले लीजिए तो हमारे उदाहरण में आगर हमें FD में 6 % मिल रहा है और वही पर Bonds में हमें 8 या 8:30 % पर मिल जाता है तो यह बहुत ज्यादा बेहतर है अगर हम रिटर्ंस और रिस्क दोनों का तुलना करें तो यहां पर रिटर्ंस और रिस्क दोनों ही हाई है दूसरी तरफ एफडी जहां पर रिटर्न और रिस्क दोनों ही कम है तो इनके बीच का ही रास्ता है Bonds कहा जाता है जहां पर ज्यादा रिस्क और ज्यादा रिटर्न्स मिलते है।

Bonds के फायदे :-

पहला यह है कि हमें इससे फिक्स रिटर्न्स मिल जाते हैं अगर कोई अपनी मंथली एनुअल इनकम देख रहा है तो यह उसके लिए काफी अच्छा शार्ट हो सकता है ।

दूसरा हम अपने इन्वेस्टमेंट को बांट सकते हैं।

Bonds और Debenture :-

Debenture में काफी लोग भ्रमित हो जाते हैं Bonds सिक्योर होते हैं कोई ना कोई एसिड सिक्योरिटी के रूप में रखा जाता है अगर हम गवर्नमेंट Bonds की बात करें तो गवर्नमेंट अपनी खुद की गारंटी देती है कॉरपोरेट Bonds अगर हम बात करें दो वहां पर ऐसेट को ऐसा सिक्योरिटी रखा जाता है दूसरी तरह Debenture सिक्योर भी हो सकते हैं और अन्य सिक्योरिटी भी हो सकते हैं तो अगर हम किसी Debenture इन्वेस्ट कर रहे हैं तो वहां पर सिक्योर है वह या अन सिक्योर है।

इंडिया मार्केट में Bonds मार्केट की क्या स्थिति है यह किस तरीके से चल रही है :-

एक तरफ हमने पहले बताया कि जो विकसित देश है चाइना की अगर हम बात करें तो इन सब देशों के अंदर Bonds मार्केट की तो यहा Bonds मार्केट स्टॉक मार्केट से बड़ी है या तो उनके बराबर है इंडिया के अंदर Bonds बहुत ही छोटी है रिटेल इन्वेस्टर्स के पास तो कोई विकल्प है ही नहीं Bonds में इन्वेस्ट करने के लिए तो ज्यादातर रिटेल इन्वेस्टर्स कैसे Bonds में कैसे इन्वेस्ट करते हैं वह सीधे म्यूचुअल फंड खरीद लेते हैं पर म्यूच्यूअल फंड अपनी फीस चार्ज करता है तो अगर आप Bonds में सीधे इन्वेस्ट करेंगे तो आपको इसका ज्यादा फायदा होगा और दूसरा हमें एक और फर्क पता होना चाहिए प्रायमरी मार्केट और सेकेंडरी मार्केट में प्राइमरी

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मार्केट क्या होती है :-

जब भी कोई Bonds मार्केट में नया आता है यानी कि Bonds का IPO आता है तो अगर उसके अंदर हम इन्वेस्ट करते हैं तो वह हो जाती है प्राइमरी मार्केट मान लीजिए NHAI ने 1 Bonds ईशु किए और हमने वह खरीद लिया और हमने 5 साल तक उसका मैच्योरिटी के लिए इंतजार किया तो हमने वह प्राइमरी मार्केट से Bonds खरीदें अगर हम उन Bonds को मार्केट को 5 साल के समय से पहले बेचना चाहते हैं तो हमें जाना होगा सेकेंडरी मार्केट में हमें नया Bonds ढुंढना पड़ेगा तो इसे कहते हैं हम सेकेंडरी मार्केट जब हम समय से पहले किसी Bonds को बेचना चाहते हैं तो अगर यहां पर हम सेकेंडरी मार्केट की इंडिया में बात करें जैसे कि हम इसकी तुलना स्टॉक मार्केट से करें जैसे आप अपने डिमैट अकाउंट के जरिए स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग कर सकते हैं स्टॉक मार्केट में काफी सारे स्टॉक लिस्टेड है ऐसी स्थिति Bonds के लिए उपलब्ध नहीं है स्टॉक मार्केट से जितने भी सारे Bonds लिस्टेड है उनकी लिक्विटी बहुत ही कम है और इस लिक्विटी की कम होने का कारण यह भी हम समझते हैं जब कोई Bonds के अंदर इन्वेस्ट करता है तो वह ज्यादातर होल्ड कर देता है Bonds रख कर लोग 5 साल 7 साल तक इंतजार कर लेता है वह बीच में Bonds को नहीं बेचना चाहते हैं तो अगर कोई Bonds को अपने पास रख ही लेगा अगर कोई बेचने वाला ही नहीं होगा तो लिक्विटीटी बहुत ही कम हो जाती है स्टॉक मार्केट की तुलना में यहां पर समाज की बात करें तो Bonds की ट्रेडिंग इंडिया में 20 -30 करोड़ से ज्यादा की नहीं होती है स्टॉक एक्चेंजेज पर लेकिन यहा जो बाकी के मार्केट से OTC (Over the counter market) वहां पर 8000 से 10000 करोड़ के रोज ट्रेंड होते हैं Bonds यह इतनी ज्यादा जो ट्रेडिंग होती है वह किसी मार्केट में या कौन करता है Bonds को बेचना कौन चाहेगा म्यूच्यूअल फंड बेचना चाहेगा इंश्योरेंस कंपनी बेचना चाहेगी अगर उसे बेचना होगा तो फैमिली ऑफिस एच एन आई यह जो बड़े-बड़े इंस्टिट्यूट है यही लोग ज्यादातर ट्रेड करते हैं Bonds पर

Cupon rate kya hota hai :-

Bonds के अंदर हम एक शब्द सुनते हैं कूपन रेट जब भी कोई नया Bond आता है तो जो इंटरेस्ट रेट का वादा किया जाता है उसे कूपन रेट कहा जाता है ।

आज हमने सीखा :-

मैं आशा करता हूँ आप लोगों को ( Bonds ) के बारे में समझ आ गया होगा. मेरा आप सभी पाठकों से गुजारिस है की आप लोग भी इस जानकारी को अपने आस-पड़ोस, रिश्तेदारों, अपने मित्रों में Share करें, जिससे की हमारे बिच जागरूकता होगी और इससे सबको बहुत लाभ होगा.

मुझे आप लोगों की सहयोग की आवश्यकता है जिससे मैं और भी नयी जानकारी आप लोगों तक पहुंचा सकूँ.लेकिन फिर भी अगर आपको हमारी इस पोस्ट Bonds क्या होता है in hindi में कहीं कोई कमी दिखाई दे तो कृपया कमेंट बॉक्स में अपनी राय दे और हमें उस कमी को सुधारने में मदद करें ,धन्यवाद यदि आपको मेरा यह लेख अच्छा लगा हो या इससे आपको कुछ सिखने को मिला हो तब अपनी प्रसन्नता को दर्शाने के लिए कृपया इस पोस्ट को Social Networks जैसे कि Facebook, Twitter इत्यादि पर share कीजिये.

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